चाल

खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला,
एक बन्दर को उसका मदारी न मिला,
ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे,
कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।।
राही (अंजाना)

Comments

One response to “चाल”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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