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  1. बहुत ही खूबसूरती से चिंता ना करने की प्रेरणा देती हुई बहुत शानदार रचना । ” चिंता में डूबे हुए ओ मनुज सुन, चिंता ना कर, चिंता चिता समान है ।” बहुत सुंदर शिल्प । सत्य ही है चिंता से कोई लाभ नहीं होता है । वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है ।

    1. इस सुंदर समीक्षा हेतु धन्यवाद शब्द भी कम है। बहुत ही सुंदर व प्रेरणादाई समीक्षा की है आपने गीता जी, जय हो

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