चुस्की चाय की

वही चाय के दो कप और एक प्लेट लौटा दे,
कोई तो तेरे साथ बीते पलों को वापस लौटा दे,
एक चाय के कप का बना कर झूठा बहाना,
वो तेरा रोज रोज मेरे घर चले आना लौटा दे,
तेरे साथ बैठ कर वो नज़रें मिलाना,
वो चाय की चुस्की वो वक्त पुराना लौटा दे॥
राही (अंजाना)

Comments

6 responses to “चुस्की चाय की”

  1. Nitesh Chaurasia Avatar

    Nice Sir ji…To bulayie kabhi chai pe 😀

    1. Shakun Saxena Avatar

      Bilkul aaiye jnab swagat h

  2. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    bahut khoob

  3. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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