चोर सा नींद मेरी चुरा ले गया

चोर सा नींद मेरी चुरा ले गया
आँख थक सी गयी दिल व्यथित हो गया,
किस तरफ को गया कुछ पता ना चला
जिंदगी की भरी भीड़ में खो गया।

Comments

6 responses to “चोर सा नींद मेरी चुरा ले गया”

  1. Geeta kumari

    वाह

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  2. सुन्दर शायरी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

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