छोड़कर इन आंसुओं को

छोड़कर इन आंसुओं को,
भाग ना सके।
और थाम भी ना सके।
गिरते रहे उसके बूंदों की तरह,
और मौसम जवां करते रहे।
जमी कुछ पथरा गई थी, इन आंखों की।
बिखरते रहे और इसे संदल करते रहे।

Comments

14 responses to “छोड़कर इन आंसुओं को”

  1. Priyanka Kohli

    क्या बात है!❤😍

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद समीक्षा के लिए

  2. अतिसुंदर रचना

    1. हौसला बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  4. Deep Patel

    अतिसुंदर

  5. Anonymous

    बहोत ही बढ़िया रचना!

    1. प्रतिमा

      Thank you

Leave a Reply

New Report

Close