यह जग दो दिन का फेरा है,
भगवान का घर ही डेरा है।
आज तुम हो यहां कल जाने कहां,
यह जग तो जीवन मरण का मेला है।
भगवान् को भज ले प्राणी,
कुछ नेक कर्म कर प्राणी।
मन में ना सोच बेईमानी,
वरना कुछ भी ना पाएगा।
मरकर सुकून भी ना पाएगा,
अच्छे कर्मों के साथ गया,
तू मोक्षधाम को जाएगा।
बुरे कर्मों का बुरा नतीजा,
वरना कर्मों के फल पाएगा।
निमिषा सिंघल
जग दो दिन का डेरा
Comments
11 responses to “जग दो दिन का डेरा”
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Good
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Thank you
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Nice one
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💓💓🙏🙏
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Nice
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🙏🙏🙏🙏
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Nice
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🌹🌹🌹🙏
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वाह बहुत सुंदर
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Nice
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उम्म्दा
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