जग में जब छा गया प्रकाश

कोई सो रहा हो,
शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो,
सूर्य की किरणें आएंगी,
आ कर उसे जगाएंगी
ऐसा वह सोच रहा हो
किंतु यदि उसी ने,
किरणों के प्रवेश का,
बंद कर दिया हो द्वार
तो किरणें कैसे जाएंगी उस पार
कौन उसे जगा पाएगा
कौन उसे बता पाएगा,
कि दिनकर तो कब के आ चुके
अपनी रौशनी फैला चुके,
जग में छा गया प्रकाश भी,
उसे उठाने का किया प्रयास भी,
किंतु जो जगना ही न चाहे,
उसे यह जग कैसे जगाए।
_____✍️गीता

Comments

10 responses to “जग में जब छा गया प्रकाश”

  1. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    Nice picturization of words

    1. Geeta kumari

      Thanks sir

  2. बहुत खूब 👌

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  3. बहुत सुन्दर रचना

    1. धन्यवाद जी

  4. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    उम्दा

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

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