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  1. “जब जज्बात तोड़ कर निकलेंगे
    जहन की दीवारों को” में अनुप्रास से अलंकृत कर मन में छिपे जज्बातों को पंक्तिबद्ध करने का सुन्दर प्रयास है. वाह

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