जब-जब ,
मैं रोई!
तब-तब ,
चैन से मां ना सोई,
मां ने पाला ,
मां ने सम्भाला,
अपना निवाला,
मेरे उदर में डाला,
कोने में रोकर ,
मुझको हंसाया,
जिंदगी क्या है,
सलीका सिखाया।
जब जब, मैं रोई!
Comments
14 responses to “जब जब, मैं रोई!”
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“कोने में राेकर हंसना सिखाया” हृदय द्रवित पंक्ति।
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सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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Dil ki baat!❤😍
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बहुत बहुत धन्यवाद
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मां की जगह कोई नहीं ले सकता
बहूत खूब रचना।-

सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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sunder
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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हार्दिक धन्यवाद सर
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मां की महिमा अपरंपार, बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति
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बहुत-बहुत आभार ,धन्यवाद
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शानदार
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धन्यवाद सर
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