जब जब, मैं रोई!

जब-जब ,
मैं रोई!
तब-तब ,
चैन से मां ना सोई,
मां ने पाला ,
मां ने सम्भाला,
अपना निवाला,
मेरे उदर में डाला,
कोने में रोकर ,
मुझको हंसाया,
जिंदगी क्या है,
सलीका सिखाया।

Comments

14 responses to “जब जब, मैं रोई!”

  1. Aditya Kumar

    “कोने में राेकर हंसना सिखाया” हृदय द्रवित पंक्ति।

    1. सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  2. Priyanka Kohli

    Dil ki baat!❤😍

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Deep Patel

    मां की जगह कोई नहीं ले सकता
    बहूत खूब रचना।

    1. सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  4. Anil Pandey

    sunder

    1. हार्दिक धन्यवाद सर

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    मां की महिमा अपरंपार, बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

    1. बहुत-बहुत आभार ,धन्यवाद

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