जब से वो गये है

आंखे हैं पर देख नहीं सकते
जुबां तो है पर कुछ कह नहीं सकते
जब से वो गये है हमारी चौकट से
न किसी को देखने की चाहत है
न गुफ़्तगु की जुस्तजु है

Comments

8 responses to “जब से वो गये है”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत खूब

  2. Satish Pandey

    श्रृंगार के वियोग पक्ष की संवेदना सुन्दर तरीके से शब्दों में उकेरी गई है। थोड़ा चौखट में टाइपिंग मिस्टेक हुई है जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में हो ही जाती है। सुन्दर भाव मुखरित हुआ है।

  3. Geeta kumari

    Nice lines

  4. javed khan Hindi

    अति सुन्दर

  5. vikash kumar

    Great

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