जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह By Priya Gupta Posted on January 8, 2016November 26, 2018 Category : हिन्दी-उर्दू कविता सोचता हूं कभी कभी क्यों हो जाते है शुष्क जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह लेकिन तभी लुड़क पडते है गर्म गर्म आंसू नर्म रुखसारों पर पिघल जाती है सारी बर्फ़ रिश्तों की |
bht khubsurat ehsaas……..waah!!
nice one priya!
nice one priya 🙂
वाह
सोचता हूं कभी कभी
क्यों हो जाते है शुष्क
जम जाते है क्यों रिश्ते
बर्फ़ की तरह
वाह वाह