अपनी कुटिल मुस्कान से तू
मुस्कुरा मत आज हम पर
(भाजी बनाने को),
आलू जरूरी हैं
जरा सा दाम कम कर।
जरा सा दाम कम कर
Comments
10 responses to “जरा सा दाम कम कर”
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Wah
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Thanks shastri ji
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गजब, कविता
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Thanks
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उम्दा
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Thanks ji
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Waah kya baat hai
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Thanks
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वाह वाह
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थैंक्स जी
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