जवानी के जोश के सन्दर्भ में

इन तीखी नजरो से देखा ना करो दिल बहक जाएगा
उम्र तो अठारह के पार है जवानी में फिसल जाएगा

फिर न कहना ये तुमने क्या कर दिया दिल के बहक जाने में
हूइ खता मैं माफ़ी चाहता हूँ जो भी हूआ जाने अन्जाने में

सम्भल कर चला करो तुम जवानी में लोगों को जेल हूई है
जिस्मनी मिजाज तक लोगों कि हरतके भी फेल हूई है

उतर जाएगा ये नशा एक दिन जवानी का उम्र ढलते ही
होगी उम्र कैद गर छेड़ा किसी महिला को राह चलते ही

निकले बूढ़े होकर जेल से सफेद बाल तो डाई कराओगे
बिना शादी के तूम हमसब के दादा जी कहलाओगे ।

अभी भी थरकी मिजाज कायम है उम्र होने के बाद भी
अब कौन सा कांड करोगे अन्दर जाने के बाद भी

Comments

5 responses to “जवानी के जोश के सन्दर्भ में”

Leave a Reply

New Report

Close