हर क्यूं का जवाब नहीं होता,
हर जवाब लाजवाब नहीं होता ।
यूं तो हम ख्वाब देखते हैं बहुत सारे,
पर, हर ख्वाब तो पूरा नहीं होता ।
जवाब
Comments
9 responses to “जवाब”
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वह पूँछते हैं भूल तो नहीं जाओगे मुझे..
मैं क्या जवाब दूँ जब सवाल ही नहीं उठता..
बहुत उम्दा वा सटीक शायरी -
बहुत बहुत धन्यवाद आपका प्रज्ञा बहन 🙏
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बहुत ही शानदार। ये पंक्तियां कवि की भाव और शिल्प पर मजबूत पकड़ को दर्शा रही हैं। keep it up, गीता जी
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सुन्दर समीक्षा के लिए सादर धन्यवाद सर 🙏
प्रेरक समीक्षा हेतु हार्दिक आभार 🙏
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अतिसुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏
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