जहर उगलने वाले

सबसे भयानक मंजर
वह होता है,
जब जहर उगलने वाला
खुद को विदूषक
समझने लगता है।
मन में इर्ष्या जलन और
खुद ही पाऊँ और न पायें
की भावना रखकर
कुएँ के मेढ़क की तरह
उछलने लगता है।

Comments

2 responses to “जहर उगलने वाले”

  1. बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुति 

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