ज़िन्दगी का सार

हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी?
रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी।
जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं,
यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है।
सागर है विशाल, लहरें भी ऊंची, तो क्या हार जाऊंगी?
खेती रहूंगी नैया, उस पार जाऊंगी ।।

Comments

12 responses to “ज़िन्दगी का सार”

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया जी

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद 🙏

  1. Prayag Dharmani

    यही यथार्थ जीवन है

    1. Geeta kumari

      Thank you ji🙏

  2. Subhash Singh

    Good

    1. Geeta kumari

      Thank you

    1. Geeta kumari

      Thanks for your nice complement

  3. Piyush Joshi

    वाह क्या बात है

    1. Geeta kumari

      Thanks for your pricious complement Piyush ji 🙏

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