हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी?
रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी।
जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं,
यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है।
सागर है विशाल, लहरें भी ऊंची, तो क्या हार जाऊंगी?
खेती रहूंगी नैया, उस पार जाऊंगी ।।
ज़िन्दगी का सार
Comments
12 responses to “ज़िन्दगी का सार”
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Bahut ache
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शुक्रिया जी
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Nice
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बहुत सारा धन्यवाद 🙏
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यही यथार्थ जीवन है
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Thank you ji🙏
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Good
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Thank you
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Nice
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Thanks for your nice complement
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वाह क्या बात है
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Thanks for your pricious complement Piyush ji 🙏
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