आज फिर ए वीर, इम्तहान की घडी आई है।
जागो ए सपूत, माँ फिर बेटा कह के बुलाई है।।
उठा के बंदूक हाथ में शरहद के तरफ चलना है।
माँ के कर्ज चुकाने का यही शुभ अवसर आया हैं।।
देश द्रोही आज फिर ,मुद्दत बाद माँ पे उंगलि उठाई है।
हमारे सुख चैन में फिर काली ग्रहण दुश्मन ने लगाई है।।
जागो
Comments
5 responses to “जागो”
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मध्य के पद की तुकबन्दी नहीं हुई।
भाव अच्छा है।
अत: सुन्दर रचना। वन्दे मातराम्।।-

Thanks
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भावपूर्ण रचना
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Thanks
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सुन्दर पर तुकबंदी नहीं है
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