जागो

आज फिर ए वीर, इम्तहान की घडी आई है।
जागो ए सपूत, माँ फिर बेटा कह के बुलाई है।।
उठा के बंदूक हाथ में शरहद के तरफ चलना है।
माँ के कर्ज चुकाने का यही शुभ अवसर आया हैं।।
देश द्रोही आज फिर ,मुद्दत बाद माँ पे उंगलि उठाई है।
हमारे सुख चैन में फिर काली ग्रहण दुश्मन ने लगाई है।।

Comments

5 responses to “जागो”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    मध्य के पद की तुकबन्दी नहीं हुई।
    भाव अच्छा है।
    अत: सुन्दर रचना। वन्दे मातराम्।।

    1. Praduman Amit

      Thanks

  2. भावपूर्ण रचना

    1. Praduman Amit

      Thanks

  3. सुन्दर पर तुकबंदी नहीं है

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