एक सुबह दे दे ऐसी ,
जो मेरा इंसाफ क़र दे!
एक शाम बीता दे ऐसी ,
जो मेरे गुनाह माफ़ कर दे !
तमाशा बहुत हो गया बनने
और बिगड़ने का,
अब तो कोई ख्वाब अपनी अमानत
समझकर अदाकर दे !
दुआ …
Comments
5 responses to “दुआ …”
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NICE LINES
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sukriya
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Good
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Wah
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Very good
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