जिंदगी इक तमाशा है
तमाशा वेखण आया ऐ बंदिया तु
वेख जी भरके ज़माने दे रंगां नु
पर किसे दा तमाशा बनावी ना
ते आपनां भी विखावी ना।
जिंदगी इक तमाशा
Comments
6 responses to “जिंदगी इक तमाशा”
-
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। आपकी कवित्त्व क्षमता प्रशंसनीय है।
-

बहुत बहुत आभार
आशा करती हूँ आपके मार्गदर्शन से निखार आएगा।
-
-
अतिसुंदर भाव
-

बहुत बहुत धन्यवाद
-
-
जिंदगी इक तमाशा है
वाह अनु जी ज़िन्दगी की परिभाषा व्यक्त करती हुई बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। उत्तम लेखन-

बहुत बहुत आभार
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.