जिंदगी

बुलाती रही तुम्हें
पर गौर न किया मेरी आवाजों पर
खुशनसीबी है मेरी ए जिंदगी
जो तेरी निगाह पड़ी मेरे अल्फाजों पर

कहा जिंदगी से मैंने
एक बार रुक तो सही
मैं जरा खुल कर दो जी लूं
पर अजीब है जिंदगी
बिना कुछ सुने चलती ही जा रही है

जिंदगी ने कहा..
मैं एक पल ठहरी हूं
दौड़ कर थक गए हो तो
मेरे साथ ही चल दो.

New Report

Close