जिन्दगी का फलसफा कौन समझ पाता है
हालात बदलते है नहीं वक्त गुजर जाता है
कल ये हुआ,कल क्या होगा इस कशमकश में, पल पल पिस जाता है
कल बदलता है नहीं आज बिगड़ जाता हैा
** ” पारुल शर्मा ” **
जिन्दगी का फलसफा

Comments
6 responses to “जिन्दगी का फलसफा”
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Behtreen
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हार्दिक आभार
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kya khoob kah apane…
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हार्दिक आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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बहुत सुंदर
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