कितनी उधेड़बुन करती हूं,
मैं इन धागों के साथ ।
जिसे जिंदगी कहते हैं ,
कभी गम की गांठ खोलती हूं।
कभी खुशियों की गांठ बांधती हूं ।
बस लगी रहती हूं ,इसे सुलझाने में।
कितनी उधेड़बुन करती हूं,
मैं इन धागों के साथ।
जिसे जिंदगी कहते हैं।
जिसे जिंदगी कहते हैं
Comments
9 responses to “जिसे जिंदगी कहते हैं”
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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क्या बात है
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धन्यवाद जी
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सुख-दुख का आना स्वाभाविक बात है मगर जिंदगी के साथ संघर्ष करना बहुत बड़ी बात ।
सुंदर भाव
बेहतरीन पंक्तियां-

धन्यवाद जी
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सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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very nice
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Thank you
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