जिसे जिंदगी कहते हैं

कितनी उधेड़बुन करती हूं,
मैं इन धागों के साथ ।
जिसे जिंदगी कहते हैं ,
कभी गम की गांठ खोलती हूं।
कभी खुशियों की गांठ बांधती हूं ।
बस लगी रहती हूं ,इसे सुलझाने में।
कितनी उधेड़बुन करती हूं,
मैं इन धागों के साथ।
जिसे जिंदगी कहते हैं।

Comments

9 responses to “जिसे जिंदगी कहते हैं”

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  1. क्या बात है

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुख-दुख का आना स्वाभाविक बात है मगर जिंदगी के साथ संघर्ष करना बहुत बड़ी बात ।
    सुंदर भाव
    बेहतरीन पंक्तियां

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

    1. Pratima chaudhary

      Thank you

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