जीत और हार

नदी के किनारे है जीत और हार
नदी का बहता पानी है तुम्हारा प्यार
नौका की जरूरत नहीं साथ रहो
पार कर जाएंगे नदी की मझधार

Comments

4 responses to “जीत और हार”

  1. बहुत सुंदर

  2. जीत और हार के मायने को समझाती कवि की सुंदर कल्पना 

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