9 Comments

  1. सब्र की जरूरत है,
    समय सब कुछ बदलता है।
    परिवर्तनशील इस संसार में,
    सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
    — आपकी रचना बहुत श्रेष्ठ रचना है। शिल्प व भाषा का सुन्दर समन्वय। जीवन दर्शन से समाहित अद्भुत समन्वय

    1. आपकी इस उत्कृष्ट और प्रेरक समीक्षा हेतु धन्यवाद करने को शब्द नहीं मिल रहे हैं सतीश जी।इस सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार सर

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