आज सुकून की तलाश करने को जी नहीं करता
तुमसे बात करने को भी जी नहीं करता
जलते हुए चिरागों में रह लिये बहुत,
चिराग दिल के जलाने को जी नहीं करता।।
जी नहीं करता।।
Comments
3 responses to “जी नहीं करता।।”
-

वाह क्या बात है। रचना बहुत सुंदर है।
अर्शे बाद आए है दोस्तों की महफिल में
चलो शमा तो जली रात के अंधेरे में।-

Tq
-
-
क्या बात है बहुत सुन्दर
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.