एक समय की बात है। गुरू द्रोण अपने दो शिष्य युधिष्ठिर एवं दुर्योधन को पास बुलाया।द्रोण -“तुम दोनो संसार को देख आओ, कौन अच्छा है कौन बुरा है “।दोनो आदेश के पालन करने के लिए निकल पड़े । कुछ दिन गुजरने के बाद दोनों गुरू द्रोण के पास पहुँचे। पहले युधिष्ठिर बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी अच्छे थे “।दुर्योधन बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी बुरे व्यक्ति थे “।ठीक उसी प्रकार जैसी हमारी दृष्टि होगी, वैसी हमारी सृष्टि होगी।
जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि
Comments
6 responses to “जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि”
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Good thinking
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Thanks
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👌
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👌
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बहुत खूब
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बहुत ही सुंदर वर्णन
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