जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में, By राही अंजाना Posted on May 31, 2018December 24, 2018 Category : शेर-ओ-शायरी जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में, आज उस खुदा ने उन्हें ज़मी का मुरीद कर दिया॥ – राही माँ पर कवितामाँ पर कुछ पंक्तियाँमाँ पर गीतमाँ पर मार्मिक कवितामाँ बाप पर कवितारुला देने वाली कविता
वाह बेहतरीन
धन्यवाद सर
Nice
अति सुंदर
कम शब्दों में बड़ी बात
बहुत ही उम्दा