जो भी सृजन हो धर्म से हो
ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना,
लेकिन क्या भारतमाता के
सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन
सृजन से दूर चले जाएँ।
नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का
सृजन युवा रक्त से हो,
इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत
सृजन की ओर अनुरक्त रहो.
हाँ सृजन की राह धर्म पर हो
सद्सृजन हो, कुकर्म न हो।
दैवी प्रकृति है वरदानी
जो भी सृजन हो धर्म से हो।
Good
वाह बहुत सही लिखा है
सादर धन्यवाद, स्वागत
Ati sundar,
Jo bhi shrijan ho dharm se ho
Thak you ji
बहुत खूब
धन्यवाद शास्त्री जी
nice
thanks