जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।
जिंदगी का मज़ा अब सवालों में है।।
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जो जाता है उसको चले जानें दो।
देख लेंगे हम ग़म के जो प्यालों में है।।
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तस्वीरों को तेरी मैं अब रखता नहीं।
बस तेरा चेहरा अंधेरे उजालों में है।।
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आँखों में मेरी है मंजिल ही मंजिल।
फिर दर्द थोड़े न पैरो के छालों में है।।
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मौसमो की तरह था जो बदलता रहा।
चर्चा उसी की वफ़ा के मिसालों में है।।
@@@@RK@@@@
जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।
Comments
9 responses to “जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।”
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DIL KO CHHU GYI GHAZAL
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धन्यवाद हौसला बढ़ाने के लिए
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बहुत खूब बेहतरीन सृजन
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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वाह
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शुक्रिया
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Good
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वाह
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Nice
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