टूट कर बिखरी नहीं,
सांस है अभी थमी नहीं।
थक चुकी है जीवन आशा ,
फिर भी लौ बुझी नहीं।
टुट कर बिखरी नहीं….
Comments
12 responses to “टुट कर बिखरी नहीं….”
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नकारात्मकता में सकारात्मक भावनाएं
बहुत खूब-

बहुत बहुत धन्यवाद
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उम्मीदों के लौ पर
हर तूफा से पार पाया जा सकता-

बिल्कुल जी ! बहुत बहुत आभार
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद जी
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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उम्मीदों की लौ , बुझी नहीं, वाह, बहुत सुंदर रचना।
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बहुत बहुत आभार मैम 🙏
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वाह वाह
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धन्यवाद जी
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