टुट कर बिखरी नहीं….

टूट कर बिखरी नहीं,
सांस है अभी थमी नहीं।
थक चुकी है जीवन आशा ,
फिर भी लौ बुझी नहीं।

Comments

12 responses to “टुट कर बिखरी नहीं….”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    नकारात्मकता में सकारात्मक भावनाएं
    बहुत खूब

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. उम्मीदों के लौ पर
    हर तूफा से पार पाया जा सकता

    1. Pratima chaudhary

      बिल्कुल जी ! बहुत बहुत आभार

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  4. Geeta kumari

    उम्मीदों की लौ , बुझी नहीं, वाह, बहुत सुंदर रचना।

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत आभार मैम 🙏

  5. Deep

    वाह वाह

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

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