तुम्हारी एक हंसी

तुम्हारी एक हंसी
सारे गम भुलाती है,
इस तरह हँसते रहो
और खिलखिलाते रहो।
गीत खुशियों के गुनगुनाते रहो
जिंदगी को हंसीं बनाते रहो।
बात ही बात में ढूँढो खुशियां,
पलों को भोग, मुस्कुराते रहो।

Comments

23 responses to “तुम्हारी एक हंसी”

  1. बहुत खूब वाह

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद सर

  3. बहुत बढ़िया वाह जी

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  4. बहुत खूब कहा सर।
    किसी ख़ास हंसी बहुत बङी मुश्किलो से लङने की हिम्मत प्रदान करता है

    1. Satish Pandey

      इतनी सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद

  5. Rishi Kumar

    रुक जाए होठों पर हंसी तो,
    गम का पता चलता है|
    बना रहे यदि गम सदा,
    अपनों का भी पता चलता है|

    कौन था अपना जो पराया बन गया,
    जिस पर थी नजर वह किनारा कर गया,
    मेरे गमों को हरने के लिए-
    मेरी बूढ़ी मां के संग मेरा पूरा परिवार आ गया|

    बहुत अच्छी आपकी कविता आपकी लेखनी को सलाम

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      Thank you

  6. बहुत अच्छा

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  7. बहुत सुन्दर

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  8. Geeta kumari

    अपनों की हंसी से ही खुश है जग सारा।
    अपनों की खुशियों में ही संतोष छिपा है हमारा।
    वाह, सर जीवन की सच्चाइयों का बहुत खूबसूरती चित्रण।

    1. Satish Pandey

      इतनी सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद, अभिवादन

  9. वाह बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  10. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  11. Satish Pandey

    थैंक्स

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