टूटता जा रहा हूँ मै

टूटता जा रहा हूँ मै .

छूटती हुई राहें-बढ़ता हुआ अँधेरा,

भटकता जा रहा हूँ मै .

टूटता  हुआ किनारा-उमड़ता हुआ सागर ,

डूबता जा रहा हूँ मै .

समाज का बंद कमरा-कमरे में मै अकेला,

घुटता जा रहा हूँ मै .

जिंदगी कि बेवफाई-निराशा कि गहराई,

टूटता जा रहा हूँ मै .

टूटता जा रहा हूँ मै .

-अनिल कुमार भ्रमर –

Comments

8 responses to “टूटता जा रहा हूँ मै”

    1. Anil Goyal Avatar
      Anil Goyal

      धन्यवादजी

    1. Anil Goyal Avatar
      Anil Goyal

      शुक्रिया

  1. Ramesh Singh Avatar

    बेहतरीन पंक्तिया

    1. Anil Goyal Avatar
      Anil Goyal

      धन्यवाद रमेशजी

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    Awesome

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