6 Comments

  1. वाह दी!
    सुंदर भाव वा शिल्प से सजी आपकी कविता एक चीख सी मन में पैदा करती है…
    उत्तम

  2. जीवनानुभूतियों को करीब से आत्मसात कर कविता का रूप लेती सुन्दर संवेदना है यह। कवि गीता जी ने ठंड में ठिठुरती असहाय मानवता का सटीक चित्र प्रस्तुत किया है। कथ्य व शिल्प की दृष्टि से उच्चस्तरीय रचना है यह।

Leave a Reply