सड़क किनारे बैठ कर,
वो कपड़े सिया करता है
सर्द हवा का झोंका,
उसको भी दर्द दिया करता है
कभी जलाकर आग,
बदन ताप लिया करता है
ये सर्दी का मौसम,
उसको भी संताप दिया करता है
एक पुरानी सी शॉल को,
बदन पर लपेट लिया करता है,
इस कड़कती सर्दी में भी
ज़िन्दगी जिया करता है
बिन स्वेटर के भी,
फुर्ती से काम किया करता है,
ये कोहरा, ये ठंडा मौसम
उसको भी परेशान किया करता है..
*****✍️गीता
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