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  1. ये मेरी दुनिया तेरी महफिल नही,
    ये तेरी महफिल मेरी दुनिया नही ।
    मैं बन्दिशों का राजा, तु रानी गगन की,
    मैं उजड़ा चमन, तु बसंत की कलि ।
    ये मेरी दुनिया तेरी महफिल नही,
    ये तेरी महफिल मेरी दुनिया नही ।।1।।

    तु है सनम किसी और के लिए,
    मैं हूँ अपना, सिर्फ अपनी जमीं के लिए ।
    तेरे घर है गगन, मेरे आँगन है धरा ।
    तेरा मेरा मिलना बोले कैसे रे हुआ?
    ये मेरी दुनिया तेरी महफिल नही,
    ये तेरी महफिल मेरी दुनिया नही ।।2।।

    लूटा दूँ अगर तुझपे ये मैं अपनी जवानी,
    पूछेगा मेरा उम्र एक दिन मुझसे ये सब कहानी ।
    तेरी दुनिया, तेरी महफिल में जश्न मनेंगे सब-दिन,
    लेकिन मैं अपनी कहानी में खो जाऊँगा एक दिन ।।
    ये मेरी दुनिया तेरी महफिल नही,
    ये तेरी महफिल मेरी दुनिया नही ।।3।।

    कवि, गीतकार विकास कुमार

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