ये न समझ कि
रोड़ी फोड़ कर गुजारा करता हूँ तो
ऐसा-वैसा ही हूँ ,
मैं भी इंसान हूँ,
भीतर-बाहर
ठीक तेरे जैसा ही हूँ।
ठीक तेरे जैसा ही हूँ
Comments
10 responses to “ठीक तेरे जैसा ही हूँ”
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Sunder
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सादर अभिवादन
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यथार्थ
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धन्यवाद जी, आभार
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ग़रीब मजदूरों का दर्द बयां करती मार्मिक रचना।
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सुन्दर समीक्षा हेतु सादर धन्यवाद, नमस्कार
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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सुंदर
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Thanks ji
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