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  1. डोली अरमानों की या शीर्षक ही अपने आप में पूरे शिल्प को और कविता को समेटे हुए हैं कविता की एक खास बात होती है कि उसका शीर्षक है पूरी कहानी कह रहा हूं आपका यह शीर्षक ऐसा ही है की शीर्षक पढ़ते ही पूरी कविता पढ़ने को पाठक मजबूर हो जाता है वाकई में कभी-कभी जब विसंगत जीवनसाथी मिलता है तो ऐसे ही उठती है डोली अरमानों की शिल्प बहुत ही मजबूत और कला पक्ष बहुत ही प्रधान है आपकी यह रचना बहुत ही खास अति उत्तम है

  2. कवि प्रज्ञा जी की बहुत ही सुंदर और काबिलेतारीफ अभिव्यक्ति है यह। एक उभरती हुई रचनाकार की प्रखर झलक है वाह

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