नींद आये अगर आपकी आंख में
तब समझना कि संतोष जीवन में है,
नींद उड़ जाये तब सोचना आप यह,
मन के भीतर भरा कोई बोझ है,
या किसी बात भर गया सोच है,
कहीं ना कहीं पर कोई लोच है।
लोच कर दूर मन में संतोष रखना
खूब मेहनत से निज राह में खोज रखना
चैन से चार घंटे बिता नींद में
उस समय तनिक भी न मन बोझ रखना।
तनिक भी न मन बोझ रखना
Comments
7 responses to “तनिक भी न मन बोझ रखना”
-

बहुत बेहतरीन रचना
-

बहुत बढ़िया कविता
-
बहुत सुंदर रचना
-
नींद आये अगर आपकी आंख में
तब समझना कि संतोष जीवन में है,
___________जीवन के सत्य को परिभाषित करती हुई बहुत ही उत्कृष्ट रचना बहुत सुंदर भाव, उत्तम लेखन -

बहुत खूब
-
वाह
-

नींद आये अगर आपकी आंख में
तब समझना कि संतोष जीवन में है,
नींद उड़ जाये तब सोचना आप यह,
मन के भीतर भरा कोई बोझ है,
या किसी बात भर गया सोच है,
कहीं ना कहीं पर कोई लोच है।बेहद शानदार प्रस्तुति उम्दा शिल्प
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.