तबाह हो गए…

दुश्वार हो गया जीना अब तो
काटों से छिल गए तलवे अब तो।
मोहब्बत में हुए हम तबाह
लोग कहते हैं,
हम बन गए शायर अब तो।
पथरा गई आँखें इन्तज़ार में उसके,
जागते-जागते हम हो गए पागल अब तो।
छोड़ देगे आज उसे ये इरादा है,
हर रात यही वादा करते हैं हम अब तो।

Comments

3 responses to “तबाह हो गए…”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव है। ऐसी कविता दिल को छू लेती है।

    1. धन्यवाद 

Leave a Reply

New Report

Close