तरकश

अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी,
हार से पहले रोता क्यूं है।
इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग,
कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,।
पलकें भिगोता क्यूं है।

Comments

13 responses to “तरकश”

  1. हिम्मत बढ़ाती हुई रचना

  2. Satish Pandey

    वाह वाह बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

    1. Geeta kumari

      बहुत आभार🙏

  4. Devi Kamla

    Very good

    1. Geeta kumari

      Thank you ji

  5. Piyush Joshi

    Bahut khoob

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया पीयूष जी 🙏

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