अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी,
हार से पहले रोता क्यूं है।
इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग,
कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,।
पलकें भिगोता क्यूं है।
तरकश
Comments
13 responses to “तरकश”
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हिम्मत बढ़ाती हुई रचना
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Thank you mam 🙏
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☺
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वाह वाह बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏
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Nice
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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बहुत ही उम्दा
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बहुत आभार🙏
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Very good
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Thank you ji
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Bahut khoob
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शुक्रिया पीयूष जी 🙏
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