तलाश

न दिल तलाश कर न धड़कन तलाश कर,
जो रूह में घर कर जाए वो दरिया तलाश कर,
झुकता नहीं है आज कोई सर किसी के आगे,
जहाँ हर आदमी झुक जाए वो चौखट तलाश कर,
शर्म के तकिये पर अब कोई सिमटता कहाँ हैं,
जो हर सिलबट मिटा दे वो बिस्तर तलाश कर॥
राही (अंजाना)

Comments

4 responses to “तलाश”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Wah Wahh Saxena Saab Badiya

    1. Shakun Saxena Avatar

      धन्यवाद जी

  2. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    welcome Ji

  3. Abhishek kumar

    Kya mast likha h

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