अपनी पलकों के बिस्तर पर मैं तुझको हर रोज सुलाता हूँ,
तू जग न जाए कहीं इस डर से पलकों को ज़रा धीरे झपकाता हूँ,
तेरे संग ही मैं अपने सभी ख़्वाबों को सजाता हूँ,
तू भूल न जाए मुझे इस डर से मैं हकीकत से नज़रें चुराता हूँ,
यूँ तो मेरे दिल में ही घर है तेरी हस्ती का मगर,
फिर भी आए दिन कागज़ पर तेरी नई तस्वीर बनाता हूँ।।
राही (अंजाना)
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