तालाब- मछली

तालाब!! तू परेशान मत हो
तेरी एक दो मछलियों की
फितरत होती ही ऐसी है
कि किसी नयी मछली के आने पर
मचल उठती हैं ईर्ष्या से,
उन्हें लगता है कहीं
ताज न छीन जाए उनकी बादशाहत का
उसे घेर लेती हैं
रोक देती हैं,
नई मछली समझ जाती है
उनकी मनःस्थिति
उसके सामने असलियत का चेहरा
उजागर हो जाता है,

Comments

8 responses to “तालाब- मछली”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह

    1. Kumar Piyush

      thank you

  2. सत्य अभिव्यक्ति

    1. Kumar Piyush

      thanks

  3. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    बहुत खूब

    1. Kumar Piyush

      dhanyvaad ji

  4. सही कहा श्लेष अलंकार का सुंदर प्रयोग

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