Author: Kumar Piyush

  • माखन चोरी मत करना

    कान्हा देख आगे से ऐसे
    माखन चोरी मत करना
    बता दे रही हूँ कह दूंगी
    मैया से
    फिर मत कहना।

  • अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त

    अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त
    चंद पैसों में तोले जाओगे
    जैसे ही आगे बढ़ोगे
    तमाम तरह की गालियां खाओगे।

  • शायरी

    कुछ इधर से खाया कुछ उधर से
    मोटे पेट हो गए
    रात भर नकली नोट छापे
    सुबह सेठ हो गए

  • ऐसे दुखी हुए

    दूसरे को आगे बढ़ते देख
    वे ऐसे दुखी हुए
    रात भर सोये नहीं
    सुबह सुखी हुए

  • मुक्तक

    पढ़ने लिखने में
    मन लगाकर
    कुछ आगे बढ़ने की
    सोच रखो बच्चो
    कुछ बनने की
    सोच रखो

  • देश भक्ति

    देश भक्ति की सरिता बहे
    देश भक्ति की कविता बहे
    ऐसी बरसात हो देश
    भक्ति की बाढ़ हो

  • प्यारी वर्षा ऋतु में

    प्यारी वर्षा ऋतु में
    देखो कितनी सुन्दर हरियाली है,
    नाहा रहे हैं सारे पौधे
    शाखाएं क्या मतवाली हैं,

  • जय हिन्द

    वीरों को नमन
    सैनिकों को नमन
    जो भी सीमा में प्रहरी तैनात हैं
    उन सभी को नमन
    जय हिन्द
    जय हिन्द

  • नाम देश का ऊंचा हो.

    देश की रक्षा
    पहला धर्म
    देश की रक्षा
    पहला कर्म,
    जुटे देश की रक्षा को,
    नाम देश का ऊंचा हो.

  • पहचान

    नाम बदलते रहा मैं
    चेहरे छुपाता रहा
    अपनी झूठी पहचान बनाने को
    पैंतरे बदलता रहा,

  • तालाब- मछली

    तालाब!! तू परेशान मत हो
    तेरी एक दो मछलियों की
    फितरत होती ही ऐसी है
    कि किसी नयी मछली के आने पर
    मचल उठती हैं ईर्ष्या से,
    उन्हें लगता है कहीं
    ताज न छीन जाए उनकी बादशाहत का
    उसे घेर लेती हैं
    रोक देती हैं,
    नई मछली समझ जाती है
    उनकी मनःस्थिति
    उसके सामने असलियत का चेहरा
    उजागर हो जाता है,

  • मुक्तक

    हम कवियों की श्रेष्ठता का निर्णय
    जबसे सॉफ्टवेयर करने लगा,
    तब से हम इतने सुपरफास्ट हो गए,
    कि
    एक घंटे में बीस बीस कवितायें
    लिखने लगे,
    एक घंटा कहाँ हम लगातार
    चार पांच घंटे के भीतर
    सौ मौलिक कवितायें
    लिखने में सफल हो गए,
    और श्रेष्ठ हो गए,
    सॉफ्टवेयर बेचारा क्या जाने
    हम अपनी मौलिक लिख रहे हैं
    या जोड़ तोड़ से,
    लेकिन
    सॉफ्टवेयर अचंभित तो ही रहा होगा
    कि हम सुपरफास्ट हो गए

  • कवि संघर्ष

    गजब संघर्ष सा देखा
    कवियों के बीच
    अपनी मौलिकता को छोड़कर
    होड़ सी करने लगे,
    नशा इतना किया गहरा
    कि किसी कवि के विचारों को
    स्वयं की बोलकर कविता
    कहने लगे कविता
    खो दी मौलिकता
    अभी भी वक्त है जागो
    अगर सचमुच में कवि तो
    होड़ पुरस्कारों की छोडो
    लिखो कुछ नयी कविता
    लिखो कुछ सत्य की कविता,
    बढ़ाओ प्रेम आपस में,
    न बनाओ
    संघर्ष कविता को

  • मुक्तक

    बरसात हो रही है
    मन झूम रहा है ऐसे
    ऊँचे ऊँचे पेड़ों की
    पंत्तियां
    झूम रही हैं जैसे,
    रिम झिम छम छम
    छम छम छम छम

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