तुम्हारे नाम की मेंहदी लगाई उसने हाथों में।
मेरे जज़्बात बन के रह गए इतिहास की बातों में।।
तुम्हारे नाम की मेंहदी
Comments
4 responses to “तुम्हारे नाम की मेंहदी”
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वियोग रस का सुन्दर चित्रण किया है आपने
निराशा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति -

वाह भाई वाह।
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धन्यवाद जी
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अति सुंदर
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