तुम्हारे नाम की मेंहदी

तुम्हारे नाम की मेंहदी लगाई उसने हाथों में।
मेरे जज़्बात बन के रह गए इतिहास की बातों में।।

Comments

4 responses to “तुम्हारे नाम की मेंहदी”

  1. Pragya

    वियोग रस का सुन्दर चित्रण किया है आपने
    निराशा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति

  2. वाह भाई वाह। 

  3. राकेश पाठक

    अति सुंदर

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