15 Comments

  1. जीवन में कभी कभी मुश्किल वक्त आ जाता है।लेकिन इसे परीक्षा की घड़ी समझ के निकल देना और आगे बढ़ जाना ही बेहतर है।

  2. तुलसीदास तो तुलसीदास थे, गर तुलसीदास न होते ।
    तो हम रामचरितमानस ग्रंथ को कैसे अध्ययन कर पाते।।

      1. मैडम हमने तुलसीदास व रामचरितमानस लिखा जरूर मगर मेरा भाव आपकी शेर से ही मिलता है। आप तुलसीदास व राभचरितमानस के पर्दे से बाहर आएं। आपको जवाब अवश्य मिलेंगे।

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