फादर्स-डे स्पेशल:-
तेरी उंगली पकड़ कर
बचपन की रेलगाड़ी में
सफर किया
सफर सुहाना था
मन को आनन्द मिला
जीवन की आड़ी-टेढ़ी रेखाओं में
दुखों की बाहुबली भुजाओं में
एक तेरे सहारे से ही ताकत मिली
सागर में ज्यों समाहित एक बूंद हुई
ऐसे ही तूने मुझे गोद लिया
स्नेह मिला तुझसे,
तेरा जो सानिध्य मिला
हे पिता ! आज तुझको नमन है
तू ही रब है मेरा, तू ही धर्म है।।
_____✍️प्रज्ञा शुक्ला
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