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  1. तेरी खामोशियां आज भी
    गीत गाती हैं
    लबों पर मेरे
    मुस्कान आती हैं
    रात थम जाती है
    उस वक़्त
    जब भी तेरी याद आती है ।।
    बेहतरीन है आपकी लेखनी की पकड़
    बेहद रूमानी कविता

  2. तेरी खामोशियां आज भी
    गीत गाती हैं
    लबों पर मेरे
    _______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की, रूमानियत से भरी हुई सुंदर कविता

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