16 Comments

  1. तह ए दिल से शुक्रिया श्रीमान जी ,इस प्लेर्फोर्म पर यह मेरी प्रथम रचना है और आपका कमेंट प्रथम कमेंट ,जो कि बहुत ही मूल्यवान है .

    1. एक ज़माने के बाद वाखिफ़ हुए हम जमाने के इस रिवाज से .
      कि बदल लिए हैं लोग अपने असूल भी सहूलियत के हिसाब से .
      तहए दिल से शुक्रिया आपका इस खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए .

    1. उसका दिया ग़म ही आजकल तो बाचीत की वजह निकलती है .कि जब भो मेरी आह नकलती है उसकी जुबां से वाह निकलती है …तह ए दिल से शुक्रिया इस होंसला अफ़्ज़ाई के लिए .

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