तेरी होठों की मुस्कुराहट का,
अलग ही फलसफा है ।
जहां खोता हूं मैं ,
और दिल हंसता है ।
भूल जाता हूं ,
मैं इस अदब को ,
जिसे मोहब्बत कहते हैं।
जहां खोया रहता हूं मैं,
मशगूल होता हूं ,
तेरी मुस्कुराहट में ।
चाहता हूं मैं,
इसकी वजह बन जाऊं।
तुम हंसो गुलिस्ता की तरह,
और मैं इसका ,
गुलशन बन जाऊं…..
तेरे होठों की मुस्कुराहट
Comments
12 responses to “तेरे होठों की मुस्कुराहट”
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Nice lines
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Thank you
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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अतिसुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अद्भुताकार
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🙏🙏
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बहुत सुंदर पंक्तियाँ
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धन्यवाद सर
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